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1 year BEd course in Rajasthan

By IRM

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1 year BEd course in Rajasthan
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1 year BEd course in Rajasthan शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की आधारशिला होती है और एक समर्पित शिक्षक उस आधार को मजबूत बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। भारत में हर वर्ष लाखों युवा अध्यापक बनने का सपना देखते हैं और विद्यालयों में पढ़ाकर समाज के निर्माण में योगदान देना चाहते हैं। इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए बी.एड (बैचलर ऑफ एजुकेशन) की डिग्री अनिवार्य मानी जाती है। बिना बी.एड के सरकारी या मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक पद पाना संभव नहीं है। ऐसे में एक वर्ष के बी.एड कोर्स की संभावित वापसी की खबर ने अभ्यर्थियों के बीच नई उम्मीद जगा दी है।

बी.एड पाठ्यक्रम में समय-समय पर हुए बदलाव

बी.एड पाठ्यक्रम का स्वरूप समय के साथ बदलता रहा है। पहले यह कोर्स केवल एक वर्ष का हुआ करता था और इसे पूरा करने के बाद उम्मीदवार शिक्षक पद के लिए पात्र माने जाते थे। बाद में शिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने और प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से इसे दो वर्ष का कर दिया गया। इस बदलाव का मकसद भावी शिक्षकों को अधिक गहन प्रशिक्षण देना था ताकि वे कक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

अब एक बार फिर एक वर्षीय बी.एड कार्यक्रम को पुनः लागू करने पर विचार किया जा रहा है। यह कदम विशेष रूप से उन अभ्यर्थियों को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है, जिनके पास पहले से उच्च शैक्षणिक योग्यता या शिक्षण अनुभव है। ऐसे उम्मीदवारों के लिए दो वर्ष का विस्तृत कोर्स अनिवार्य करना कई बार समय और संसाधनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण साबित होता है। एक वर्ष का कोर्स उनके लिए तेज़ और प्रभावी विकल्प बन सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है एक वर्षीय बी.एड

एक वर्षीय बी.एड कार्यक्रम केवल अवधि में छोटा है, गुणवत्ता में नहीं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पहले से शिक्षित और प्रशिक्षित अभ्यर्थी कम समय में आवश्यक शिक्षण कौशल प्राप्त कर सकें। इससे न केवल उम्मीदवारों का समय बचेगा बल्कि देश में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी को भी शीघ्र पूरा किया जा सकेगा।

कई ऐसे अभ्यर्थी होते हैं जिन्होंने स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है या पहले से किसी शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसे डी.एल.एड या बी.एल.एड पूरा किया है। उनके लिए दो वर्ष का बी.एड कोर्स दोहराव जैसा हो सकता है। ऐसे में एक वर्ष का केंद्रित और सघन पाठ्यक्रम उन्हें सीधे पेशेवर जीवन में प्रवेश करने का अवसर देगा।

एक वर्षीय बी.एड का पाठ्यक्रम और संरचना

हालांकि यह कोर्स अवधि में छोटा होगा, लेकिन इसका पाठ्यक्रम काफी व्यवस्थित और गहन होगा। इसमें शिक्षण के सैद्धांतिक पहलुओं के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। बाल मनोविज्ञान, शिक्षा का दर्शन, शिक्षण पद्धतियां, मूल्यांकन प्रणाली और कक्षा प्रबंधन जैसे विषय इसमें शामिल रहेंगे।

सैद्धांतिक अध्ययन

छात्रों को यह समझाया जाएगा कि विभिन्न आयु वर्ग के विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता कैसे अलग-अलग होती है। उन्हें शिक्षण की आधुनिक तकनीकों, डिजिटल उपकरणों और नवीन शिक्षण रणनीतियों का उपयोग सिखाया जाएगा। पाठ योजना तैयार करना और छात्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना भी इस कोर्स का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

व्यावहारिक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप

कोर्स के दौरान विद्यालयों में अनिवार्य इंटर्नशिप कराई जाएगी। इस अवधि में छात्र वास्तविक कक्षा में पढ़ाने का अनुभव प्राप्त करेंगे। अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन में वे अपनी शिक्षण शैली को विकसित करेंगे और व्यवहारिक चुनौतियों का सामना करना सीखेंगे। चूंकि यह एक वर्ष का कार्यक्रम होगा, इसलिए नियमित उपस्थिति और अनुशासन अत्यंत आवश्यक होंगे।

पात्रता मानदंड: कौन कर सकता है आवेदन

एक वर्षीय बी.एड कोर्स सभी उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध नहीं होगा। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए तैयार किया जा सकता है जिनके पास पहले से उच्च शैक्षणिक योग्यता या शिक्षण का अनुभव है। स्नातकोत्तर डिग्री धारक, पूर्व शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थी या शिक्षण क्षेत्र में कार्यरत उम्मीदवार इस कोर्स के लिए पात्र हो सकते हैं।

हालांकि पात्रता शर्तें विश्वविद्यालय और राज्य के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित संस्थान की आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचनी चाहिए।

प्रवेश प्रक्रिया कैसे होगी

प्रवेश प्रक्रिया संस्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। कुछ विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा के माध्यम से चयन करेंगे, जबकि कुछ मेरिट के आधार पर प्रवेश देंगे। अधिकांश संस्थान ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया अपनाते हैं, जहां अभ्यर्थी आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं।

चयन के बाद दस्तावेज सत्यापन और काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन की अंतिम तिथि, शुल्क संरचना और आवश्यक प्रमाणपत्रों की सूची को ध्यानपूर्वक पढ़ें।

बी.एड के बाद करियर के अवसर

एक वर्षीय बी.एड पूरा करने के बाद अभ्यर्थी विभिन्न शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में शामिल हो सकते हैं। सरकारी विद्यालयों में नियुक्ति के लिए TET, CTET और राज्य स्तरीय परीक्षाएं अनिवार्य होती हैं। बी.एड डिग्री धारक इन परीक्षाओं में बैठने के योग्य बन जाते हैं।

निजी विद्यालयों, इंटर कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में भी प्रशिक्षित शिक्षकों की मांग बनी रहती है। इसके अतिरिक्त आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन शिक्षण, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, कोचिंग संस्थान और शैक्षणिक कंटेंट निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। कई शिक्षक अब ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कर स्वतंत्र रूप से आय अर्जित कर रहे हैं।

प्रवेश से पहले ध्यान देने योग्य बातें

कोर्स में दाखिला लेने से पहले यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि संबंधित संस्थान मान्यता प्राप्त हो। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) से मान्यता प्राप्त संस्थान से ही बी.एड करना चाहिए। बिना मान्यता वाले संस्थान से प्राप्त डिग्री भविष्य में अमान्य हो सकती है।

सोशल मीडिया या अनौपचारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर भरोसा करने के बजाय केवल आधिकारिक वेबसाइट या विश्वविद्यालय से ही पुष्टि करें। यदि किसी प्रकार की शंका हो तो सीधे संस्थान के कार्यालय से संपर्क करें।

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